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श्रावण माह में शिवार्चन (8)- (श्री नागेश्वर जी, गुजरात) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

दारुक वन में दारूक राक्षस, शिव भक्तों को दे संताप।
उनकी रक्षा को तब प्रगटे, श्री नागेश्वर अपने आप।
दारुक का गौरीशंकर ने, किया वहाँ पर तब संहार।
इनके दर्शन से कट जाते, जन्म-जन्म के सारे पाप।
बड़ी महत्ता नागेश्वर की, भारत भर में इनका नाम।
भक्त द्वारका जो भी आयें, दर्शन को आते इस धाम।
दसवाँ ज्योतिर्लिंग यही है, दर्शन से सब दुख हों दूर,
भक्तजनों का मेला लगता, प्रांगण में , नित आठों याम।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




