संगीत, संस्कृति और लोककला के समर्पित साधक है मिथिला रत्न कृष्ण कुमार कन्हैया – कुमार संदीप

utkarshexpress.com – पंचदिवसीय नि:शुल्क कथक, कजरी एवं मिथिला पेंटिंग कार्यशाला में प्रशिक्षक की भूमिका निभा रहे मिथिला रत्न कृष्ण कुमार कन्हैया कला और संस्कृति जगत की एक विशिष्ट पहचान हैं। उनका संपूर्ण जीवन संगीत, लोकसंस्कृति और भारतीय कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित रहा है। कृष्ण कुमार कन्हैया केवल एक प्रशिक्षक नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने वाले प्रेरणास्रोत हैं। कथक की लय, कजरी की मिठास और मिथिला पेंटिंग की रंग-संवेदना को बच्चों और युवाओं तक पहुँचाने में उनका योगदान अत्यंत सराहनीय है। उनके मार्गदर्शन में अनेक कलाकारों ने अपनी प्रतिभा को निखारा है और कला के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।
बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी साधना, समर्पण और सृजनशीलता के कारण वे आज बिहार की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सम्मानित हैं।
— कुमार संदीप , सिमरा, बंदरा, मुजफ्फरपुर (बिहार)




