ग़ज़ल – रीता गुलाटी

दर्द अपना सभी से छुपाना पड़ा।
पास होकर हमे दूर जाना पड़ा।
बात मीठी सदा यार हमसे करे,
संग कुर्बत के हमको निभाना पड़ा।
प्यार करते उन्हे दिलो जान से,
राज दिल का नदामत मे छिपाना पड़ा।
है भले आज दुनिया जहानत भरी,
झूठ बोले सभी जग बताना पड़ा।
झेलते हम रहे उनकी शैतानियां,
मन नही था मगर मुस्कुराना पड़ा।
जग मे अब तो दिखे ना शराफत भी *ऋतु,
दूर रह कर हमे खिलखिलाना पड़ा।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
पीते हो क्यो शराब जरा होश मे रहो,
अच्छी कहाँ?खराब जरा होश मे रहो।
नेकी भरी है जो दिल मे महसूस तुम करो,
नेकी करे जनाब जरा होश मे रहो।
इस जिंदगी मे यार उन्हे चाहते बड़ा,
रहना है बन के गुलाब जरा होश मे रहो।
पाला तुम्हें है प्याऱ से कीमत समझ लो तुम,
बनते हो तुम नबाब जरा होश मे रहो।
माँ बाप की नज़र मे बने लाड़ले बड़े।
होगा सभी हिसाब जरा होश मे रहो।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
पीते हो क्यो शराब जरा होश मे रहो,
अच्छी कहाँ?खराब जरा होश मे रहो।
नेकी भरी है जो दिल मे महसूस तुम करो,
नेकी करे जनाब जरा होश मे रहो।
इस जिंदगी मे यार उन्हे चाहते बड़ा,
रहना है बन के गुलाब जरा होश मे रहो।
पाला तुम्हें है प्याऱ से कीमत समझ लो तुम,
बनते हो तुम नबाब जरा होश मे रहो।
माँ बाप की नज़र मे बने लाड़ले बड़े।
होगा सभी हिसाब जरा होश मे रहो।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




