नारी का बलिदान — नीलांजना गुप्ता

आज बताती हूँ मैं तुमको नारी के बलिदान को
क्यों है ठेस लगाई तुमने नारी के सम्मान को
भ्रूण परीक्षण करवा कर क्यों बेटी को मरवाते हो
बेटों की लालच में कितने मंदिर मस्जिद जाते हो
इकीसवीं सदी के अंत तक जग की वह हालत होगी
नामोनिशां भी नही मिलेगा नारी का तब आफत होगी
नारी के अभाव में कैसे सृष्टि संचालन होगा
अगली पीढ़ी आने पर क्या पुरुष गर्भ धारण होगा
करना होगा यह प्रयोग भी धरती पर विज्ञान को
क्यों है ठेस लगाई…………
इन दहेज की लपटों ने है कितनी वधुओं को निगला
कितने हैं कानून बनाये फिर भी अर्थ कुछ न निकला
खिलने के पहले बिखर गई डोली व अर्थी साथ चली
थी यही कली जो इस घर में बाबुल के हाथों हाथ पली
मत बहने दो अश्रुकण को तुम इसकी कीमत को जानो
मत तौलो नारी जीवन को इसके महत्व को पहचानो
आशा की किरण है डूब रही तुम उदय करो फिर भानु को
क्यों है ठेस लगाई……..
जीजाबाई न होती तो वीर शिवा पैदा न होते
ममता का आँचल न होता ईश्वर भी अवतार न लेते
दया,क्षमा व धैर्य शील की यह तो है प्रतिमा साक्षात
सिर्फ तुम्हारे इन कर्मों से इसने खोया है विस्वास
लेना होगा संकल्प तुम्हें एक नया मोड़ तुम लाओगे
इन जंजीरों को तोड़ आज नारी को आगे लाओगे
कायम रखना ओ वीरो तुम मातृ शक्ति की शान को
क्यों है ठेस लगाई………….
– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश




