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पर्यावरण -श्याम कुंवर भारती

बिगड़े मौसम में तूफान आ गया ,लगा के आग अब न हवा दीजिए।
सुख गए हैं जो पेड़ बिना पानी के , जरा सा सींचकर अब दवा दीजिए।
डाल के रसायन खाद उपजाऊ मिट्टी में, जहर घोल डाला हमने।
मर न जाये कोई खा के अनाज खेतों का अब दुआ कीजियें।
जो न करना था हमे किया सब वही हमारी प्यारी धरती के संग।
उजाड़के जल जंगल जमीन धरती से जिंदगी को न जुदा कीजिए।
बढ़ा दिया है तापमान इतना ग्लेशियर सब ध्रुवों अब पिघलने लगे ।
बढ़ा कार्बन और एसी फ्रिज चलाके खुद को अब न सजा दीजिए।
-श्याम कुंवर भारती ,बोकारो, झारखंड




