मनोरंजन
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रिश्तों की गूंज- प्रियंका सौरभ
रिश्ते – वो मौन स्पंदन, जो न फासलों से बंधते हैं, न ही समय की सीमाओं से, ये तो दिल…
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ग़ज़ल – विनोद निराश
राजे-दिल अब वो बतलाने लगे है, मसअला पुराना सुलझाने लगे है। मिज़ाजे-मौसम की बात न पूछो, बादे-शबा आज बहकाने…
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मेहनत और सफलता – ज्योती कुमारी
तप के बिना कोई फल खिले—ये गीता की मधुर पुकार, कर्म की रोशनी ही तोड़ती है भाग्य का गहरा अँधियार।…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
जो चोट लगी दिल पर,स्वीकार नही होगा। ऩफ़रत है मुझे तुमसे इजहार, नही होगा। धोखा जो दिया तूने रूसवा…
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रोबोट के साथ मस्ती – डॉ. सत्यवान सौरभ
मेरे घर आया एक रोबोट, जो करता हर काम जो मुझसे हो न हो। खेल-खेल में मुझे सिखाता, नया ज्ञान…
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अनकही – सविता सिंह
किस पथ पर सखे ऐसे मिले शुरू कैसे हो वह सिलसिले। भरे पूरे चमन तुम्हारे क्यों ना उन यादों को…
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उम्मीदों की पहली किरण – रोहित आनंद
पूर्व दिशाओं में रंग सुनहरा, छाई हल्की-सी झंकार , उठा धरा का कोना-कोना, आई भोर लिये उपहार। लाल किरण की…
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ज़िद्दी बेल- प्रदीप सहारे
घर के आँगन में दिखी एक छोटी दो पत्तों की बेल। धीरे-धीरे चढ़ने लगी, दीवार से छत पर। तो सुहानी…
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गीत- जसवीर सिंह हलधर
रोशनी ने काम कब पूरा किया है । तब अँधेरों ने हमें धोखा दिया है ।। हर तरफ ही…
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आधुनिकता – ज्योती कुमारी
आधुनिकता की इस तेज़ रफ़्तार में अब ऐसा चलन है, कि चंदा मामा भी दूर नहीं — बस “टूर” भर…
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