मनोरंजन
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
सजते रहे हैं बिकने को बाजार की तरह, सहते हैं जुल्म भी गुनहगार की तरह। सहते रहे है…
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गद्दारी का साया – प्रियंका सौरभ
मुठ्ठी भर थे वो, फिर भी सदियों राज किया, अपनों की कमज़ोरी से, उन्होंने ये खेल रचा। स्वर्ण…
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जयतु मातु अम्बे – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
माता को प्रणाम करें चरणों में शीश धरें, उनके आशीष हेतु ध्यान नित किया करें। हृदय को रखें…
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स्यात् प्रासांगिक – अनुराधा पांडेय
दृष्टि ही कुछ लोग की गहरी न थी । भूमिकाएं कथ्य के अनुरूप थी। ला दिया हमनें हवा…
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विजयी बनाइए- सुनील गुप्ता
भारत माता का हरेक बच्चा-बच्चा, नित आगे बढ़ता चले, हाथ में तिरंगा रहे…, चलो, विजयी बनाइए !!1!! जज़्बा…
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अपेक्षा क्यों – श्याम सुंदर
चाह जब जुड़ जाएं परिणाम से अपेक्षा का… होता है आगमन मन की शांति का फिर होता है गमन…
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डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र हिंदी के भक्त हैं – कवि संगम त्रिपाठी
Utkarshexpress.com जबलपुर – डा कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ लखनऊ हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दे रहे…
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जीवन के रंगमंच पर बिगड़े बोल (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – जीवन के इस रंगमंच पर अभिनय की अपनी लाचारी, पर्दा उठता पर्दा गिरता, आते हैं सब बारी…
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पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती
अब तू ही बता तुझे कैसे भुलाया जाय, दिए तेरे ज़ख्मों को कैसे बहाया जाय। हद होती है…
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गीतिका — मधु शुक्ला
दे रहे दुख आदमी को आजकल अधिकार, सह रहा घाटा तभी कर्तव्य का व्यापार। हम हुआ अभिशप्त मैं…
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