मनोरंजन
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सदैव असंतुष्ट … विपक्ष – विवेक रंजन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – मानव जाति की सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक “असंतोष” ही है। यदि आदमी संतुष्ट होता, तो आज भी जानवरों…
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नन्हे कदम, बड़े सपने – डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हे-नन्हे कदम बढ़ें, सपनों की ओर, हर दिन नया सूरज, हर रात नये चोर। बारिश की बूँदों में कागज़…
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हम क्यों लगाये यहाँ – गुरुदीन वर्मा
हम क्यों लगाये यहाँ, दिल यूँ किसी से। ऐतबार हमको नहीं, यहाँ किसी दिल पे।। छोड़कर हाथ कल को,…
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प्रभु का कृपा ये ज़िन्दगी – कालिका प्रसाद
ज़िन्दगी के बारे में क्या बताऊं, चार दिन की है ये प्यारी ज़िन्दगी। कभी फूलों की सी सुगंध…
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योग-संगीत कवि सम्मेलन – पृथ्वी सिंह बैनीवाल
योग-संगीत ही वैदिक संस्कृति। कदै न आवै कोई उसमें विकृति।। ऑनलाइन कवि सम्मेलन होगा। अध्याय इसका झारखंड होगा।। ऑनलाइन सम्मेलन…
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एहसास – ज्योति श्रीवास्तव
किस तरह से कहें दिल के जज़्बात को, जो बिताई वो घड़ियां पहर रात को। बोझ सी ये लगी श्वास…
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मैंने उसी दिन सोच लिया था – पीयूष गोयल
utkarshexpress.com – एक छोटे से कस्बें में, कस्बें से दूर एक धार्मिक परिवार रहता था, परिवार में सिर्फ चार…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
यार करना छोड़ दो तकरार तुम, प्यार बाँटो जग मे बन झंकार तुम। यार जैसी हूँ मुझे स्वीकार…
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वो एक बात – ज्योत्सना जोशी
कहीं एक किनारे से शिरा पकड़ने की कोशिश करती हूं , वो दूसरे छोर से छूट जाता है, एक…
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गीतिका – मधु शुक्ला
श्वेत श्याम स्मृतियों के कण दृग, में जब-जब पड़ जाते हैं, होंठों पर मुस्कान साथ जल, आँखों में ले …
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