मनोरंजन
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एहसास – ज्योति श्रीवास्तव
दूरियों के सितम से गुज़रते रहे, अक्स आया नज़र तो संवरते रहे। खास अहसास बन के सदा पास हो, तो…
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गीतिका — मधु शुक्ला
जब कभी गाँव छूट जाता है, व्यक्ति धन और गम कमाता है। मित्र परिवार से विलग होकर ,…
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शब्द मेरे अर्थ तुम्हारे – विवेक रंजन श्रीवास्त
utkarshexpress.com – कुछ किताबें होती हैं जो अपने पन्नो में गहरे अर्थ संजोए होती हैं। वे मन मस्तिष्क को मथती हैं।…
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जाना कहाँ तक – अनिरुद्ध कुमार
बताओ जरा और जाना कहाँ तक, मिरा साथ देगा जमाना कहाँ तक। चलें साथ मिलके अभी दूर मंजिल, हमें क्या…
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जब जाग रही होती है सारी दुनिया – गुरुदीन वर्मा
जब जाग रही होती है सारी दुनिया, तो मैं सो रहा होता हूँ , और बुन रहा होता हूँ…
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हम्मर पिया गेल परदेस में (मैथिली) – प्रकाश राय
हम्मर पिया गेल परदेस में, हमरा लेल दाल-रोटी कमाए। जखन उ परदेस से लौट के एथिन, चुपचाप हमरा दिल में…
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जनभावनाओं को भुनाने का माध्यम बना सिंदूर – डॉ. सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – एक चुटकी सिंदूर की क़ीमत क्या होती है। इसका मतलब उससे पूछा जाना चाहिए, जिसका दाम्पत्य जीवन उजड़…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
सजते रहे हैं बिकने को बाजार की तरह, सहते हैं जुल्म भी गुनहगार की तरह। सहते रहे है…
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गद्दारी का साया – प्रियंका सौरभ
मुठ्ठी भर थे वो, फिर भी सदियों राज किया, अपनों की कमज़ोरी से, उन्होंने ये खेल रचा। स्वर्ण…
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