मनोरंजन
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जयतु मातु अम्बे – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
माता को प्रणाम करें चरणों में शीश धरें, उनके आशीष हेतु ध्यान नित किया करें। हृदय को रखें…
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स्यात् प्रासांगिक – अनुराधा पांडेय
दृष्टि ही कुछ लोग की गहरी न थी । भूमिकाएं कथ्य के अनुरूप थी। ला दिया हमनें हवा…
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विजयी बनाइए- सुनील गुप्ता
भारत माता का हरेक बच्चा-बच्चा, नित आगे बढ़ता चले, हाथ में तिरंगा रहे…, चलो, विजयी बनाइए !!1!! जज़्बा…
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अपेक्षा क्यों – श्याम सुंदर
चाह जब जुड़ जाएं परिणाम से अपेक्षा का… होता है आगमन मन की शांति का फिर होता है गमन…
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डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र हिंदी के भक्त हैं – कवि संगम त्रिपाठी
Utkarshexpress.com जबलपुर – डा कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’ लखनऊ हिंदी के प्रचार-प्रसार में अपना अमूल्य योगदान दे रहे…
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जीवन के रंगमंच पर बिगड़े बोल (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – जीवन के इस रंगमंच पर अभिनय की अपनी लाचारी, पर्दा उठता पर्दा गिरता, आते हैं सब बारी…
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पूर्णिका – श्याम कुंवर भारती
अब तू ही बता तुझे कैसे भुलाया जाय, दिए तेरे ज़ख्मों को कैसे बहाया जाय। हद होती है…
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गीतिका — मधु शुक्ला
दे रहे दुख आदमी को आजकल अधिकार, सह रहा घाटा तभी कर्तव्य का व्यापार। हम हुआ अभिशप्त मैं…
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जिसकी जैसी सोच – राजेश कुमार झा
**जिसकी जैसी सोच उसने वैसा समझा मुझे।** **हम तो फूल थे लोगों ने काटा समझा मुझे** **किसी की सोच को…
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ये स्कूल हैं या सज़ा की तहरीर – डॉ सत्यवान सौरभ
कहाँ हैं वो जो कहते थे, उजाले बाँट देंगे, यहाँ तो चीखते सपने, अंधेरे काट देंगे। किताबें हैं मगर…
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