आभासी दुनिया – सुनील गुप्ता

चिठ्ठी-पत्री अब लिखे
गुजर गई है एक उमर !
पहले यही एक साधन था.,
हालचाल जानने का इधर !!1!!
अब कहीं न आते-जाते
दूरियां पहले से कम हुई !
लिए मोबाइल हाथ में सभी..,
मनचाही खूब बातें कही !!2!!
तौर तरीके सभी बदल गए
पठन-पाठन डिजिटल हुआ !
वर्चुअल लोग मिलने लगे..,
जन्म आभासी दुनिया का हुआ !!3!!
दिनचर्या लोगों की बदली
पीपल तले, कहाँ शामें ढलें !
बंद एसी कमरों के बीच..,
दिन परवान चढ़ें, उम्र ढले !!4!!
निकटस्थ भी अब दूर हुए
पड़ोसी हैरान विस्मित दिखें !
एक ही छत के नीचे बैठे…,
व्हाट्सप्प से संबंध तार जुड़ें !!5!!
संचार क्रांति का बिगुल बजा
संसार सिमट के हाथ में आ गया !
नित होते नए अविष्कारों से…,
सुख सुविधाओं का विस्तार हुआ !!6!!
पहले प्रेम सद्भाव लेता हिलोरें
अब बढ़ने लगी है नित कटुता !
कोई बोल तो ले, दो मीठे शब्द…,
इसके लिए, अब दिल तरसता !!7!!
सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान




