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पूर्णिकांश – श्याम कुंवर भारती

देव शिल्पी विश्वकर्मा –
देव शिल्पी श्री विश्वकर्मा विश्व में शिल्प के निर्माता हैं।
रचते नित्य नूतन जग में शिल्प कर्मकारों के बिधाता है।
स्वर्ग लोक और पृथ्वीलोक में नहीं कोई बाबा जैसा है।
छैनी हथौड़ा है यंत्र इनका शिल्पकारों के अन्नदाता है।
मेरे मर्ज़ की दवा तू –
मेरे मर्ज़ की देवा तेरे पास है मगर तुझको ही पता नहीं।
दर्द देकर मुस्कुराता है तेरे हुस्न कसूर तेरी खता नहीं।
ऐसा क्यों होता है देता है कोई दर्द उम्र भर का इश्क में।
भूलने नहीं देता न प्यार करता कह दो तेरी रजा नहीं।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड




