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अटल तुम्हारी जय – अनिल भारद्वाज

अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।
फूलों सी मुस्कान तुम्हारी जय हो।
राष्ट्रभाषा की सुगंध से,
तुमने दुनिया को महकाया।
परदेशी मंचों पर तुमने,
हिंदी का परचम लहराया।
हिंदी के तूफान तुम्हारी जय हो।
अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।
भारत माता सोच रही है,
तुम सा लाल कहां से लाए,
तुम जैसे अनमोल रतन को,
फिर से भारत रत्न दिलाए।
राष्ट्रभक्ति के गान तुम्हारी जय हो।
अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।
तुम तो एक अजातशत्रु थे,
दुश्मन के भी अटल मित्र थे।
अद्भुत और प्रखर वक्ता थे,
राजनीति के वृत्तचित्र थे।
रणनीतिज्ञ महान तुम्हारी जय हो
भारत मां की शान तुम्हारी जय हो।
कविताओं के नीलकमल थे,
भारत मां के वरद पुत्र थे।
राजनीति के राजहंस थे,
दुश्मन के भी परम मित्र थे।
भारत की पहचान तुम्हारी जय हो।
अजर अमर हे अटल तुम्हारी जय हो।
– अनिल भारद्वाज एडवोकेट, हाईकोर्ट ग्वालियर




