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मौसम करवट बदल रहा है – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

मौसम करवट बदल रहा है,
धीरे-धीरे रंग नया ढल रहा है,
ठंडी हवाओं की चादर हटती,
गर्मी का सूरज पल-पल जल रहा है।
सुबह की ओस अब कम मुस्काती,
धूप तेज़ी से कदम बढ़ाती,
पेड़ों की छाँव पुकार रही है,
धरती तपन की कहानी सुनाती।
कोयल की आवाज़ भी बदली-सी,
प्यासे पत्तों की भाषा सच्ची-सी,
नदियाँ धीमी सांसें लेतीं,
हवा में गर्मी की आहट कच्ची-सी।
आम की खुशबू बागों में फैली,
लू की लहरें राहों में ठहरी,
गर्मियों की पहली दस्तक ने,
हर ऋतु की चुप्पी फिर से कह दी।
मौसम करवट बदल रहा है,
जीवन का पहिया चल रहा है,
हर तपन में छिपा संदेश यही—
सहन में ही नया पल पल रहा है।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम, छत्तीसगढ़




