मनोरंजन
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उजाड़ कर बसे – प्रियंका सौरभ
कभी थे ये हरियाली के गीत, जहाँ पंछियों की थी मधुर प्रीत। पेड़ों की छाँव में बजता था जीवन,…
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छंद छटा – जसवीर सिंह हलधर
ब्याज को तो छोड़िए जो,मूल भी बचा न सके , ऐसे कारोबार में निवेश किस काम का । …
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जिंदगी – राजेश कुमार झा
*टेंशन और भाग दौड़ जिंदगी सभी है। * *कभी टेडी तो कभी उलझी जिंदगी है।। *जब थक हार कर …
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
फलक का चाँद अब जमीं पे आज मुस्कुराएगा, फिजा मे अब चमक रही वो चाँदनी भी लायेगा। बिना…
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मोदी को बता देना – डॉ सत्यवान सौरभ
आता हमें हर शत्रु को जड़ से मिटा देना, दम है तो तो फिर कहना—”मोदी को बता देना।” कलमा…
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कड़ी धूप – सुनील गुप्ता
( 1 ) कड़ी धूप रहती है दिनभर, इसमें बाहर मत निकलना !! ( 2 ) नौ तपा चल रहा…
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मिशन सिंदूर – क्षमा कौशिक
वो जिसने पूछकर जाति चला दी शीश पर गोली। मिटा डाले सभी सुख चैन खेली खून की होली।। ।। अभी…
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गीतिका – मधु शुक्ला
वाणी पर अंकुश रखने की , कला जिन्हें आती, अपनेपन की डोरी उनसे , छूट नहीं पाती। सोच समझ कर…
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कहां है स्वर्ग ? (कहानी) – उषा जैन ‘शीरीं’
Utkarshexpress.com – दर्द से कराहते हुए सुहानी ने घुटनों पर हाथ रखा और बमुश्किल खड़ी हुई। उसने अपनी दृष्टि…
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पूर्णिकांश – श्याम कुंवर भारती
खून के आंसू – किया है जो तुमने माफी के काबिल नहीं है तुमको रुलाया नहीं तो कहना। निर्दोषों…
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