धर्म

एकोऽहं बहुस्याम् – सुनील गुप्ता

( 1 ) बने एक से

हम सभी अनेक.,

‘बहु’, से एक  !!

( 2 ) एक बीज से

सभी पुष्प उपजे.,

एक अनेक  !!

( 3 ) एक ईश्वर

पर्याय हैं अनेक.,

सभी हैं एक !!

( 4 ) जानें समझें

आत्म परमात्म को.,

अपने ‘स्व’, को  !!

( 5 ) मुझमें ईश

तुझ्रमें बसे ईश.,

है बहुस्याम्  !!

– सुनील गुप्ता

जयपुर, राजस्थान |

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