समझे जीवन-साथ — डॉo सत्यवान सौरभ

अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ,
वक़्त पड़े वे चल पड़े, छुड़ा-छुड़ा कर हाथ॥
जिनको हृदय में स्थान दे, माना था दिन-रात,
विपदा आते ही बदल, गए सभी हालात।
विश्वासों की डोर भी, टूट गई उस रात—
अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ॥
सुख के सारे क्षणों में, जिनको रखा था साथ,
दुःख की आई घड़ियाँ, खींच लिए सब हाथ।
भीड़ भरे संसार में, सूने रहे जज़्बात—
अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ॥
चेहरों के इस मेल में, किसे करें हम याद,
अपनों की पहचान भी, बनती रही फ़साद।
स्वार्थों के इस खेल में, टूटे सारे नात—
अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ॥
सीखा जीवन ने मगर, एक यही है बात,
जो खुद का संबल बने, वही निभाए साथ।
आत्मदीप जब जल उठे, मिट जाते आघात—
अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ॥
— डॉo सत्यवान सौरभ,333, परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा – 127045,
मोबाइल :9466526148, 01255281381



