मनोरंजन

सर्दी – नीलांजना गुप्ता

सर्दी के दिन में लगे अतिथि न आवे गेह।

ठंडी पुरवइया चले तो भागा फिरे सनेह।।

 

घर घर में कौडा जले मूँगफली की बहार।

बातों की महफिल सजे सजे लोक व्यवहार।।

 

पूस माघ की ठंड प्रभु कर दो बेड़ा पार।

जल के दर्शन मात्र से हो जाये उद्धार।।

 

ठंडी तू बड़ी पापनी मत कर यूँ आखेट।

महलों में ही सिमट जा मत झोपड़ी को देख।।

 

महलों को चिंता नहीं ठंडी आवे जाय।

पुरवइया के जोर से झोपड़ी रही थर्राय।।

 

सर्दी का कोहरा घना नभ पर छाई धुंध।

सूरज दादा छिप गए किरणें हो गई कुंद।।

 

लहसुन अदरक हींग लो सरसों का साग।

अजवाइन सेवन करो सर्दी जाये भाग।।

-नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

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