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कोयल के गीत सुरीले – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

कोयल के गीत सुरीले, मन को छू जाते हैं,
अंबर की शांति में, स्वर मधुर गूंजाते हैं।
हरियाली की गोद में, मीठा राग सजाती,
नन्हे पत्तों संग मिल, सरगम नई बनाती।
काली सी काया उसकी, सुर उजियारे जैसे,
सुनते ही मन झूमे, सपने प्यारे जैसे।
बसंत की बयार संग, तान नई ले आती,
सूनी डालों पर भी, खुशियाँ खिलखिलाती।
ना कोई साज हाथ में, ना कोई राग सीखा,
फिर भी हर दिल को, उसने अपना ही दीखा।
दूर कहीं अमराई में, छुपकर गीत सुनाती,
हर एक धड़कन में, मधुर लहरें जगाती।
उसकी बोली में जैसे, प्रेम की गहराई,
हर स्वर में छिपी हुई, जीवन की सच्चाई।
कोयल के गीत सुनो, मन निर्मल हो जाए,
हर दुख की छाया, पल में दूर हो
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम ,छत्तीसगढ़




