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श्री हरि का आशीर्वाद- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

नारायण का जाप हो तो दूर भवताप हो,
हरि को मनाने हेतु जपें हरि नाम को।
भक्त पे दयालु आप क्षमा करें सभी पाप,
जप नित किया करें छोड़ के आराम को।
कर्म में प्रवीण हों और प्रार्थना में लीन हों,
प्रभु का भजन करें त्याग अन्य काम को।
पवित्रता बनी रहे भक्ति अति घनी रहे,
शुद्ध आचरण हेतु तजें तामझाम को।
वट सावित्री –
वट की पूजा करें सुहागिन, पति की आयु बढ़ाने को।
अक्षुण्ण रहे सुहाग हमेशा, प्रभु से यह वर पाने को।
हर पादप का अति महत्व है, जीवन चक्र चले जिनसे,
वृक्षों की रक्षा करनी है, जग को यह बतलाने को।
-कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




