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सितम मौसम के – सुनील गुप्ता

( 1 ) सितम
मौसम के,
क्या-क्या नहीं सहे हमने !!
( 2 ) भरम
था हमें,
गर्मी से पार पा ही लेंगे !!
( 3 ) बेदम
था मौसम,
पर, हार नहीं मानी थी हमने !!
( 4 ) कदम
रुके नहीं,
हर मौसम में हम बढ़ते चले !!
( 5 ) आलम
गर्मी का देख,
हर स्थिति को संभाला था हमने !!
( 6 ) मुजस्सम
नख-शिख तक,
नहाए हुए थे पसीने में अपने !!
( 7 ) मरहम
लगाने को,
आखिर आके गिरी आसमां से ठंडी बूंदे !!
मुजस्सम : पूरी तरह से शरीर के साथ।
– सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान |




