हिंदी-बज्जिका साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर हैं : प्रो. डॉ. पुष्पा गुप्ता – कुमार संदीप

utkarshexpress.com (मुजफ्फरपुर -बिहार) – हिंदी और बज्जिका साहित्य की प्रतिष्ठित रचनाकार एवं शिक्षाविद् प्रो. डॉ. पुष्पा गुप्ता आज साहित्य जगत की अग्रणी हस्तियों में गिनी जाती हैं। 19 जनवरी 1954 को मुजफ्फरपुर के गोविंदपुरी (बीबीगंज) में जन्मी प्रो. गुप्ता ने नौवीं कक्षा से कविता लेखन की शुरुआत की और वर्ष 1981 से साहित्य सृजन की निरंतर यात्रा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। बिहार विश्वविद्यालय के एम.डी.डी.एम. कॉलेज में हिंदी विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय प्रोफेसर के रूप में उन्होंने वर्षों तक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। एनसीसी अधिकारी, क्रीड़ा परिषद् की अध्यक्ष तथा दूरदर्शन की फिल्म ‘काकी’ में अभिनय के माध्यम से भी उन्होंने शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उनकी साहित्यिक कृतियों में ‘रामवृक्ष बेनीपुरी’, ‘सोहनलाल द्विवेदी’ पर आलोचनात्मक ग्रंथ, ‘पंख पखेरू’, ‘मन मयूर’, बज्जिका की बाल साहित्य कृति ‘बज्जिका बाल किरन’, कहानी संग्रह ‘बिंदिया’ तथा ‘बज्जिका बसंत’ का संपादन विशेष रूप से चर्चित हैं। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बज्जिका भाषा के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रो. डॉ. पुष्पा गुप्ता की साहित्यिक पहचान देश-विदेश तक पहुँची है। उनकी रचनात्मक साधना को अंतरराष्ट्रीय हिंदी सेवी सम्मान, बाबा साहब डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय फेलोशिप, ‘श्रीराम रत्न सम्मान-2024’, ‘मुजफ्फरपुर शिखर सम्मान-2025’ तथा ‘महाकवि रमण शिखर सम्मान-2026’ सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
वर्तमान में वे मुजफ्फरपुर स्थित ‘अनुराग भवन’ में रहकर स्वतंत्र लेखन और समाजसेवा में सक्रिय हैं। साहित्यकारों के अनुसार उनकी विद्वत्ता के साथ उनकी सहजता और सादगी भी उन्हें विशिष्ट बनाती है, जिसके कारण वे साहित्य जगत में समान रूप से आदर और सम्मान की पात्र हैं।




