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भोजपुरी पौराणिक होली – श्याम कुंवर भारती

काशी में खेले होली महादेव
काशी में खेले होली।
श्मशान भभूत भरी धुरी उड़ावे ,
नाचत गावत भूत धूम मचावे।
भस्म चिता भरी भरी झोरी ।
काशी में खेले होली।
गंगा के तीरे भोला मगन होई घूमे,
फगुआ के धुन में जटा खूब धुने।
डमरू बजाई गावे शिव होली।
काशी में खेले होली।
नंदी झूमे भैरव कोतवाल खूम झूमे।
बउराई गंगा शिव चरणवा के चूमे।
फुफकारी नगवा पिचकारी छोरी।
काशी में खेले होली ।
भारती भगत बाबा नशा के दीवाना।
भोला के फगुआ मगन सारा ज़माना।
देवता खेले आई स्वर्गवा के छोड़ी।
काशी में खेले होली।
काशी में खेले होली महादेव
काशी में खेले होली।
– श्याम कुंवर भारती ( राजभर)
बोकारो,झारखंड, मॉब.9955509286




