मनोरंजन
-
वट सावित्री व्रत – सुनील गुप्ता
( 1 ) सुख समृद्धि सौभाग्य का प्रतीक.., महाव्रत ये !! ( 2 ) करें प्रार्थना अखंड सौभाग्य की.., माता…
Read More » -
चिंता करने का नाटक (व्यंग्य) – सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com उड़ान भरने के उपरांत पुनः नीड़ की ओर लौटना ही परिंदे की नियति है। आसमान में उसका स्थाई आवास नहीं…
Read More » -
नवोदय वैश्विक प्रज्ञान साहित्यिक संस्थान के पटल पर ‘त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये’ ई-पत्रिका का विमोचन सम्पन्न
utkarshexpress.com – डॉ. राजीव रंजन मिश्र एवं प्रतिभा पाण्डेय के जन्मोत्सव पर ‘त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये’ ई-पत्रिका भाग-8 एवं 10…
Read More » -
परिवार दिवस – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
घर केवल ईंटों का ढांचा नहीं होता, यह रिश्तों की धड़कनों से बना संसार होता। जहाँ दादी की कहानी में…
Read More » -
संयम का ज्ञान और खर्च के गणित का गड़बड़झाला (व्यंग्य) – मुकेश “कबीर”
utkarshexpress.com सरकार ने आग्रह किया कि विदेश जाकर ज्यादा खर्च न करें, वहाँ से सोना नहीं खरीदें। इस बात का…
Read More » -
प्रभाती वंदन – डॉ गीता पांडेय
गुरुवर होते सूर्य सम, भरते हृदय प्रकाश। शिष्यों को शुचि ज्ञान दे, करें तिमिर का नाश। लक्ष्य मार्ग बनता सुगम,…
Read More » -
समझे जीवन-साथ — डॉo सत्यवान सौरभ
अपनाए जिनको सदा, समझे जीवन-साथ, वक़्त पड़े वे चल पड़े, छुड़ा-छुड़ा कर हाथ॥ जिनको हृदय में स्थान दे, माना…
Read More » -
मातृ शक्ति (आल्ह छंद में गीतिका) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
माँ जननी माता या माई, मदर बोलता है संसार। अलग बोलियों भाषाओं में, दिए नाम हैं कई हजार।1 सबके नयनों…
Read More » -
विदेशी आंकड़ों पर नाचते देशी किटाणु (व्यंग्य)- सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – अपनी ख़ासियत है कि अपन को अपने आप पर बिल्कुल विश्वास नही है। विदेश की धरती से जब…
Read More » -
माँ का एहसान – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
माँ का एहसान क्या शब्दों में उतर पाएगा, जितना लिखूँ, उतना ही मन और झुक जाएगा। जब पहली बार आँखें…
Read More »