मनोरंजन
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मूक वार्तालाप – प्रवीण त्रिपाठी
दो मित्रों में हो रही, दिल से दिल की बात। भाषा का बंधन नहीं, भावों में निष्णात ।।1 दोनों हैं…
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आम( विधा- आइकू) – डॉ ओम प्रकाश मिश्र ‘मधुब्रत’
आइकू:- नवीन काव्य विधा है, यह हाइकु और फायकू के जोड़ पर ही नव प्रस्तावित विधा है। हाइकु में जहाँ…
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मन क्यूँ बहका – सविता सिंह
ना जाने मन क्यों हर्षाया, किसने है ये राग सुनाया, विकल आहत इस तन मन पर फिर वही बसंत है…
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पृथ्वी – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
धरती ने चुपके से मुझसे कहा, “कब तक यूँ ही मुझको तुम जलाओगे?” मैंने झुककर उसका हाथ थामा, पर उत्तर…
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सर्दी – नीलांजना गुप्ता
सर्दी के दिन में लगे अतिथि न आवे गेह। ठंडी पुरवइया चले तो भागा फिरे सनेह।। घर घर में…
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मनुष्य की व्यथा – अविनाश श्रीवास्तव
मनुष्य हूँ मैं… मुस्कान ओढ़े फिरता हूँ, भीतर कितने तूफ़ान हैं, ये किससे कहता हूँ? भीड़ में रहकर भी अक्सर…
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इश्क बिना हुस्न फीका – श्याम कुंवर भारती
इतनी मोहब्बत किया फिर भी तुझसे मेरे करीब आया न गया। इश्क इतना आसमां न समाए तुझे मेरा नसीब बनाया…
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नियति – सुनील गुप्ता
नि यत नेक चले भाग्य जगाए…, शांति दिलाए !! 1 !! य म नियम चले जो अपनाए…, आनंद पाए …
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प्रकृति – कविता बिष्ट ‘नेह’
नवल किरण हैं झूमती, अपने प्रांगण आज। रूप धरा का खिल उठा, सजे प्रकृति के साज।। सजे बाग में कामिनी,…
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कोयल के गीत सुरीले – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
कोयल के गीत सुरीले, मन को छू जाते हैं, अंबर की शांति में, स्वर मधुर गूंजाते हैं। हरियाली की गोद…
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