डॉ• अनुराधा प्रियदर्शिनी द्वारा रचित *सारंग राग * एक शानदार काव्य संग्रह – डॉ• पूर्णिमा पाण्डेय पूर्णा

utkarshexpress.com – सरल ,सहज युवा कवयित्री अनुराधा प्रियदर्शिनी जी की सारंग राग शानदार काव्य संग्रह है कवर पेज बहुत आकर्षक है।
डॉ रविंद्र कुमार जी द्वारा आमुख लिखा है उन्होंने कहा सारंग राग में आध्यात्मिकता है सनातन मूल्य का पुट है सौंदर्य और प्रेम है,ज्ञान विवेक की झलक है।
आ.भूपेश प्रताप सिंह जी ने सारंग राग को बहुआयामी कृति बताया।
डॉ अभि दा ,आ. पद्मधर झा की शुभकामनाएं हैं।
अनुक्रमणिका बहुत सुनियोजित ढंग से बनी है जिसमें 61 रचनाएं हैं। गजानन गणपति से शुरू होकर माघ माह के दोहों पर समाप्त होती हैं ।
वंदना में गजानन गणपति ,मातु शारदे , चरण वन्दना, हे अंबिका जगदंबिका को समर्पित रचनाएं हैं ।
गजानन की स्तुति बहुत सुंदर ढंग से की है
गणपति गणनायक सब कुछ सुखदायक
मंगल मूरत विघ्नहरो।
मोदक मनभावन, मूषक वाहन
गज मुख धारण स्वप्न धरो।।
मातु शारदे की वंदना करते हुए आपने मन के भावों को इस प्रकार व्यक्त किया है।
स्वरों की देवी तुम हो माँ
नमामि मातु शारदे
सोना चांदी का मतलब,रिश्ते नाते उनसे जुड़ कर खुशियाँ पाते,समता के हक़दार यहाँ सब, दान करो, दीपक,मिला तभी सूरज,मन की नदी,करना पड़े उपाय,परिमल प्रेम विधान आदि सभी रचनाएं एक से बढ़ कर एक है।
तीर्थराज प्रयाग रचना की पंक्तियों में भारतीय संस्कृति एवं आध्यात्मिक आस्था को प्रस्तुत किया है।
तीर्थ राजा कहे जो गए,
घाट धारा त्रिवेणी भये।
है बुलाते चले आइये,
पाप धो पूर्ण को पाइए।।
कैसी बाधा, नवभोर, वसुंधरा, सावन में, हे विधाता,करो कुछ काम,झूला, बदल रहा ज़माना,रक्षाबंधन, विदाई,मानव तन की महिमा, करवा चौथ,माघ माह के कुछ दोहे आदि सभी रचनाएं सराहनीय हैं। इस काव्य संग्रह में विभिन्न विधाओं में रचनाएं है। रचनाओं के शीर्षक बहुत सुंदर मन को मोहने वाले हैं।
कविताओं में एक प्रवाह है कम शब्दों में सारगर्भित बात कही है। भाषा शैली सरल सहज हृदय को स्पर्श करने वाली है जो पाठकों को निश्चय ही प्रेरित करेगी।
अनुराधा प्रियदर्शिनी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं आपकी लेखनी ऐसी है ही चलती रहे। सारंग राग काव्य संग्रह नए आयाम गढ़ें ऐसी मेरी कामना है। समीक्षिका – डॉ पूर्णिमा पाण्डेय ‘पूर्णा ‘, प्रयागराज




