देश-विदेश

दुनिया के मजदूरों एक हो– पर पहले इंसान तो बनो (आलेख) – अनमोल कुमार

utkarshexpress.com – 1 मई मजदूर दिवस क्यों?
1886, शिकागो, अमेरिका : मजदूर बोले – “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम, 8 घंटे अपने लिए”। मालिकों ने गोली चलाई। 7 मजदूर शहीद। उनकी कुर्बानी से “मई दिवस” जन्मा। मृत मजदूरों के रक्तरंजित कपड़े को उछालते हुए मजदूरों ने नारा बुलंद किया। इन्कलाब जिन्दाबाद! दुनिया के मजदूरों एक हो।
भारत में : 1923 में चेन्नई में पहली बार मनाया। लेबर किसान पार्टी के नेता सिंगारवेलु चेट्टियार ने लाल झंडा फहराया।
तभी से मजदूर संघ का झंडा लाल हुआ।
मतलब : ये मजदूरों का “दिवाली-दशहरा” है। हक का दिन, हिसाब का दिन।
2026 में श्रमिक की दशा –
1886 की लड़ाई 2026 की हकीकत
8 घंटे काम : मनरेगा में 8 घंटे पर 245 रु। शहर में 12 घंटे पर 500 रु। डिलीवरी बॉय: 14 घंटे, न PF न छुट्टी।
बाल मजदूरी बंद हो ईंट-भट्ठा, ढाबा, घर में आज भी 1 करोड़ बच्चे। किताब की जगह बोझा।
महिला-पुरुष बराबर दाम: खेत में महिला 200 रु, पुरुष 300 रु। घर ,खेत ,बच्चा 16 घंटे काम, पर “बेरोजगार”।
सम्मान से जीना :”मजदूर” कहना आज भी गाली। शादी में सबसे पीछे खाना। नेता फोटो खिंचाए, दाम न बढ़ाए।
पलायन का दर्द : 5 लाख लोग पलायन। चेन्नई में 12 घंटे छड़ बांधते हैं। कमरा 10×10 का, 8 लोग। त्योहार पर घर आते हैं तो हाथ खाली, शरीर टूटा।
नया मजदूर : B.A., M.A. पास लड़का 15 हजार में कॉल सेंटर। रात भर “Hello Sir”, दिन में सोना। इसे “व्हाइट कॉलर मजदूर” कहते हैं।
सार : 1886 में लड़ाई “समय” की थी। 2026 में लड़ाई “सम्मान ,सुरक्षा स्थायित्व” की है।
दिशा क्या हो? –
“मालिक-मजदूर का भेद मिटाओ। हाथ को श्रम, दिमाग का श्रम – दोनों श्रम दो ।”
पसीने में हुनर मिलाओ –
245 रु/दिन मनरेगा छोड़ो। 15 दिन राजमिस्त्री, प्लंबर, ड्रिप-मिस्त्री, मशरूम ट्रेनिंग लो। 800 रु/दिन कमाओ। स्किल इंडिया + KVK को पकड़ो।
गांव में ही काम बनाओ –
पलायन रुकेगा जब गांव में पैसा दिखेगा। कैसे?
कार्बन मजदूर : 1 तालाब खोदो, 50 हजार। दुनिया पैसा दे रही।
गौ-आधारित मजदूर : 1 गाय = रोज 10 किलो गोबर। 5 रु किलो बेचो = 50 रु रोज बैठे।
जल-श्रमिक : डोभा, मेड़बंदी, पेड़ लगाना – ये सब मनरेगा से अलग “ग्रीन जॉब”।
इज्जत का कानून –
नाम बदलो : “मजदूर” नहीं “श्रम-वीर”, “निर्माता” कहो। बोर्ड लगाओ – “श्रम-वीर चौक”।
ग्राहक धर्म : सामान खरीदो तो पूछो – “बनाने वाले को दाम मिला?” सस्ता नहीं, न्याय-संगत खरीदो।
युवा : डिग्री के साथ ITI भी। पलायन नहीं, गांव में स्टार्टअप। “जॉब सीकर नहीं, जॉब गिवर”।
नागरिक : घर में काम वाली बाई को “दीदी” कहेंगे। दिवाली बोनस देंगे। इंसान समझेंगे।
हाथ को काम दो, काम को दाम दो, दाम को सम्मान दो।
ईंट जोड़ेगा हिंदुस्तान, तो ताजमहल भी किसान।
1 मई छुट्टी नहीं, “हवन” का दिन है। पूछो अपने से – क्या मेरे जिले के आखिरी मजदूर को रोटी, छत, दवाई मिली?
श्रमिक दिवस पर विशेष आलेख – 1 मई

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button