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मूक वार्तालाप – प्रवीण त्रिपाठी

दो मित्रों में हो रही, दिल से दिल की बात।
भाषा का बंधन नहीं, भावों में निष्णात ।।1
दोनों हैं मासूम अरु, छल प्रपंच से दूर।
पशु पक्षी भी मन पढ़ें, बँटे नेह भरपूर।।2
शक्ति प्यार में है बड़ी, सबको लाती खींच।
आपस में विश्वास वे, करते आँखें मीच।।3
गुड़िया मुनिया गुन रहीं, क्या खेलें हम लोग।
सारे जग को भूल कर, कर लें नये प्रयोग । 4
मासूमों में पनपता, नहीं स्वार्थ का भाव।
इनसे लेकर सीख हम, फैलाएँ सद्भाव।।5
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




