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मैं बेवकूफ हूँ (हास्य) -सुधीर श्रीवास्तव

utkarshexpress.com – आज सुबह-सुबह मित्र रमराज ने मुझे फोन करके कहा- प्रभु! आप बेवकूफ हैं। मैंने हँसते हुए पूछा -यह बात तुझे आज इतने दिनों बाद समझ में आई? कैसा यार है तू, जो इतने दिनों में भी अपने यार को अच्छे से नहीं जान पाया।
मगर यह तो बता आज तुझे ऐसा क्यों लगा कि मैं बेवकूफ हूँ, ऐसा मैंने क्या किया, जो तुझे मेरी तारीफ करने का ख्याल आया।
उत्तर में यमराज ने गुस्से से कहा – प्रभु आप सचमुच बेवकूफ हैं ,आप मानोगे तो है नहीं, मगर मैं भी आज कहे बिना नहीं रहूँगा। आप जो कर रहे हैं उसका नफा नुकसान भी आप ही झेल रहे हैं, आप जाने किस मिट्टी के बने हैं, कि आपको कुछ समझ ही नहीं आता।बस हर किसी के साथ सेवा, सहयोग, सद्भाव, प्रेम, विश्वास, आत्मीयता, मार्गदर्शन और जाने क्या-क्या करते रहते हैं, बदले में आपको मिलता क्या है? उलाहना, शिकवा- शिकायतें , ढेरों बुराइयाँ, बदनामियाँ और फिर धोखा। कोई फायदा नहीं इन सबका। अब बंद कीजिए यह सब। ‘नेकी का दरिया में डाल’ वाला फार्मूला आज के जमाने का सबसे घटिया है। आप हमारे मित्र हैं इसलिए आपको यह नेक सलाह दे रहा हूँ , अच्छा है सोच विचार कीजिए या ना कीजिए मगर मेरी बात पर अमल जरूर कीजिए।
फिर गहरी साँस लेकर गंभीर होकर कहने लगा -यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो निश्चित मानिए एक दिन बहुत पछताएंगे, तब आपको मेरी बात समझ में जरुर आएगी, मगर तब तक बहुत देर हो जाएगी। क्योंकि तब तक आपके हाथों की के तोते उड़ जाएंगे और आप सिर्फ पछताएंगे और अपने आप में ही घुटते रह जाएंगे, सिर्फ हमारा काम बढ़ाएंगे, बेवजह सिर्फ अपनी कविता ही मुझे सुनाएंगे, मेरे चाय, पानी पर सबसे पहले प्रतिबंध लगाएंगे।
मैंने प्यार से उसे रोकते हुए कहा – मगर तुझे ऐसा क्यों लगता है?
यमराज दुःखी होकर बोला -क्योंकि मैं आपको खुश देखना चाहता हूंँ, कोई आपकी बुराई करे, यह मैं बर्दाश्त नहीं कर सकता और अब जब लोग मुझे फोन कर आपकी बुराई करते हैं, तो सच कहूँ, बड़ा गुस्सा आता है, कुछ कर गुजरने का मन करता है,मगर आपका, आपकी भावनाओं, नसीहतों का ध्यान आते ही विवश हो मन मसोस कर रह जाता हूँ। क्योंकि मैं आपको कभी भी, किसी भी हाल में दुःख नहीं पहुँचाना चाहता।
अच्छा है मेरी नेक सलाह मानिए, उस पर योगी स्टाइल में अमल कीजिए।अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दीजिए, अपना ख्याल रखिए और अपनी लेखन यात्रा को आगे बढ़ते रहिए ।जीवन का बोनस के अलावा जो भी कम-ज्यादा समय शेष है, उसे अपने लिए सुरक्षित रखिए। औरों की खैरख्वाही के चक्कर में पड़कर बेवजह अब परेशान मत होइए। कोई नहीं काम आने वाला, यह गाँठ बाँध लीजिए। यह कलयुग का दौर है, यहाँ हर रिश्ते-नाते, संबंध स्वार्थ के हैं, बिना स्वार्थ कोई किसी पर थूकता भी नहीं। और आप हैं कि बस……।सच कहूँ! तो मेरा भी आपके साथ स्वार्थ का ही रिश्ता है। क्योंकि मुझे भी अपना एक शुभचिंतक, एक साथी चाहिए, जो मुझे अपना कहे, मेरे सुख-दुख को महसूस करें और अगर मैं भटकने लगूँ या किसी गलत राह पर बढ़ने लगेँ तो वह मुझे अधिकार पूर्वक रोके समझाए, सही सलाह देकर, प्यार से या डाँट-मारकर मुझे सही राह दिखाए और जब मेरा मन करे तब मुझे चाय पिलाए, नाश्ता और भोजन कराए। अपने पास बुलाते, बैठाए, मेरी सुने अपनी सुनाएऔर सिर्फ और सिर्फ आप कर सकते हैं।बस इसीलिए…..। कहते कहते मेरा यार भावुक हो गया
मैंने उसका धन्यवाद करते हुए समझाया कि वह परेशान न हो और फोन काट दिया, फिर सोचने लगा कुछ गलत भी तो नहीं कह रहा है, यही तो हो रहा है मेरे साथ, समझ में नहीं आता ऐसा मेरे ही साथ होता है या औरों के साथ भी ऐसे ही होता है। होता भी है या नहीं, जो भी है इस बात का वास्तव में मुझे भी एहसास हो रहा है कि समय के साथ चलना ही बुद्धिमानी है।आज के जमाने में आप जिसे रास्ता दिखाओगे, सही गलत का अहसास कराओगे, वही कल आपकी बदनाम करेगा और आपको सच बताऊँ तो मेरे साथ ऐसा एक दो बार नहीं, बहुत बार हो भी चुका है। मगर मैं भी तो अपनी आदत से मजबूर हूं। क्या करूँ? अपनी आदत ही ऐसी है कि छूटती ही नहीं। जाने कितने धोखे खाए, अपमान सहे, बदनामियाँ झेली और बेवकूफी का तमगा तो जाने कितनी बार मिला, मिला क्या? रोज ही मिल रहा है, कहाँ तक सहेजूँ, अब तो इतना हो गया कि सँभल ही नहीं रहा है।।
मगर मैं भी सोचने लगा हूँ कि बस!अब और नहीं, आज मेरा सबसे प्यारा यार जब इतना परेशान और दुखी है, तो इसका मतलब साफ है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अब मुझे अपने लिए न सही, अपने मित्र यमराज के लिए खुद को बदलना होगा, अपने लिए जीना होगा और दुनिया जाए भाड़ में, मुझे कोई फर्क पड़ेगा, इस भाव को तेजी से विकसित करना होगा। जब तक मैं ऐसा नहीं बन जाता हूँ, तब तो मैं भी यह मानने को बाखुशी तैयार हूंँ कि हाँ ‘मैं बेवकूफ हूँ’।
इस स्वीकारोक्ति के साथ आप सबको एक सलाह यह भी दे रहा हूँ कि आप मुझे बेवकूफ समझिए या कुछ और।मगर मेरे यार यमराज को छेड़ने, दुखी करने या उससे मेरी बुराई करने के बारे में कभी गलती से भी सोचिएगा मत। वरना आप सब बहुत पछताएंगे और इसके जिम्मेदार आप सब खुद होंगे। क्योंकि यमराज की छोड़िए मेरा भी कुछ…… नहीं पायेंगे। सिर्फ घर बैठकर गरियाएंगे, जिसका कोई लाभ भी इस क्या आने वाले जीवन में भी नहीं पायेंगे, ।
शुभकामनाओं के साथ आप सबसे विदा लेता हूँ और फोन पर यमराज को शाम की चाय का आमंत्रण देकर माहौल को हल्का करने की बेवकूफी करता हूँ।
आप सबका शुभ, अशुभ चिंतक, बेवकूफ मित्र…….।

-सुधीर श्रीवास्तव, गोण्डा, उत्तर प्रदेश

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