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कुशल – जया भराड़े बड़ोदकर 

utkarshexpress.com – गांव का लड़का है वह स्कूल जाना चाहता है पर घर में पिताजी चाचा जी खेती कर ने में बिजी रहते है। गांव में पूरा परिवार ही खेती के काम में लगा रहता है। समय पर फसल नहीं होती तो बड़ी मुश्किल हो जाती है। कभी बारिश तो कभी गर्म हवा तो कभी कुछ हमेशा नैसर्गिक वातावरण गड़ बड़ा जाता है। कभी कभी किसान अपना जीवन खेती में पूरा बिता कर भी सफल नहीं हो पाता है। आज कुशलको सब कुछ समझ में आने लगा है। वो नौ साल का हो चुका है पर जैसे बूढ़े लोगों सा सयाना हो गया है। उसने ठान लिया कि वह यहां नहीं रहेगा। गांव से बाहर जा कर पूरे गांव की दशा बदल देगा। पर कैसे?कुछ भी समझ नहीं पा रहा था। एक दिन वह घर छोड़ के शहर की तरफ निकल पड़ा। और शहर पहुंच गया। वहां उसने चाय कैंटीन में कप प्लेट धोने का काम पकड़ लिया था। थोड़े दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ ने लगी। उसे अपने घर की याद आने लगी। पर उसने हिम्मत…

प्रिंसिपल ने पूरी छानबीन कर के बच्चों को अपराधियों के चंगुल से छुड़ा लिया। उसने कुशल की दूरदर्शिता की बहुत तारीफ की। उन बच्चों के पिता बहुत बड़े व्यापारी थे। जिन के बच्चों की जान उसने बचाई थी। वो कुशल को  अपने घर ले गए। कुशल की हकीकत सुनी उन्होंने कुशल के गांव में स्कूल खोल दिया। उसकी पूरी शिक्षा की जिम्मेदारी उन्होंने खुद अपने ऊपर ले ली। गांव मे अब खुशहाली छा गई थी। पूरे गांव को शिक्षित कर के जीवन मेंजीने के अनेक रास्ते खोल दिए थे। गांव का संकट हमेशा के लिए दूर हो गया था।

-जया भराड़े बड़ोदकर, टाटा सीरिन, ठाणे, वेस्ट मुंबई (महाराष्ट्र)

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