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मां – जया भराड़े बड़ोदकर

तेरे उपकार की सीमा कहां?
तेरे जीवन शैली सी कहानी कहां?
तू ही भगवान यहां,
तेरा अनवरत निस्वार्थ प्रेम जहां।
तू ही तो जन्नत सभी की,
तेरा मंदिर मेरे दिल में वहां।
पूज्य है तेरे चरण,
करु मैं इसको स्मरण।
खुदाई भी लूट जाएगी वहां,
दर्शन हो ईश्वर के सदा।
खुश रहे वो सेवा में ही सदा,
मेरी मां तुझे शत शत नमन।
-जया भराड़े बड़ोदकर, टाटा सीरिन,
ठाणे, वेस्ट मुंबई, महाराष्ट्र
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