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ग़ज़ल – रीता गुलाटी

माँ सुनाती आज लोरी,बस सुलाने के लिये,
प्यार से देती है थपकी,दुख मिटाने के लिये।
आ बिठा लूँ दिल मे अपने बस निभाने के लिये,
शेष जीवन साथ तेरे अब बिताने के लिये।
क्या खता मुझसे हुई थी,तोड़ डाला दिल मेरा,
दिल का इक टुकड़ा है बाकी,टूट जाने के लिये।
बस वो आया जिंदगी मे,और चाहत भर गया,
खुशबुओं का था वो पैकर, मुस्कुराने के लिये।
जिंदगी है खूबसूरत, दे रही खुशियां बड़ी,
प्यार मे ताक़त बड़ी है,ग़म़ भुलाने के लिये।
अब कहाँ दिखते हैं जग मे,वो दिवाने प्यार के,
मर मिटे जो आशिकी मे,जां बचाने के लिये।
खोल कर देखे थे कल फिर खत पुराने यार के,
हाथ लेकर आज देखे वो लुभाने के लिये।
खूबसूरत फूल खिलते,बाग़ मे महके हुऐ,
अब बगीचे यार पहुंचे, फूल लाने के लिये।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




