मनोरंजन

जी लो जी भर कर – सविता  सिंह 

सही बात है सहेजना,

क्यों! भला मन को मारना,

यूँ खास पल की चाह में,

ख़ुशी को क्यों है टालना?

जो रखी तू संजोकर ,

आएगा सुनहरा अवसर ,

आस क्यों है शुभ दिवस का ,

रख रही हो क्या सोचकर।

क्या जाने कहीं आज ही ,

बन जाये एक उत्सव ही

बिन कारण ही होठों पर ,

आ गईं फिर हँसी कहीं।

समझ रही हो जानेमन

कहना क्या चाहे ये मन ,

जो पल मिला है राहों में,

बस वही सबसे बड़ा धन।

जी लो हर इक एहसास ,

न सोचो अब हो कुछ खास ,

जो मिल रहा है जिस पल में,

बसा लो उसे साँस साँस।

-सविता  सिंह  मीरा, जमशेदपुर

 

 

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