मनोरंजन
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खुद को जाना – ज्योत्सना जोशी
दूसरों को मिलकर उनको कितना जान पाएं हैं यह कहना मुश्किल है लेकिन उनको मिलने के पश्चात स्वयं तक कुछ…
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नींद और जागृति – प्रियंका सौरभ
नींद तो हर रोज़ खुलती है, पर क्या खुलती हैं आँखें सच में? मन के अंधेरों में कहीं छुपी,…
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यादों की छांव में (कहानी) – किशन लाल शर्मा
utkarshexpress.com पुणे – पुणे रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में रमन बैठा था। वह एक मीटिंग से वापस लौट रहा था।…
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मनीषियों ने भव्य समारोह में डॉ. रामप्रवेश पंडित की ‘वाणी वंदना’ का किया लोकार्पण
utkarshexpress.comऔरंगाबाद – हिन्दी साहित्य भारती के तत्वावधान में आयोजित इसके जिला महामंत्री सह विमला पांडेय मेमोरियल ज्ञान निकेतन विद्यालय के…
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वन्दे मातरम् – सुनील गुप्ता
वन्दे मातरम् है मिट्टी से प्रेम का, एक आह्वान !!1!! है स्वाभिमान हमारे अस्तित्व का, महान गान !!2!! …
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छंद छटा (वन्देमातरम) – जसवीर सिंह हलधर
दासता से जूझने को , लिखा गया एक गीत , शब्द का सिपाही ख़ास संत्र वन्देमातरम । जाति और मज़हबी,बीमारी…
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गीतिक – मधु शुक्ला
अब नया कौटिल्य कोई देश हित में ढूंढ लायें, स्वर्ग सी सुंदर मनोहर निज धरा को हम बनायें । एकता…
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विचारों की सुंदरता ही असली सुंदरता – फौजिया नसीम शाद
utkarshexpress.com – अक़्सर ख़ूबसूरती को केवल चेहरे की बनावट, रंगत और महंगे सौंदर्य-उत्पादों से जोड़ा जाता है। लेकिन यह सच नहीं…
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गजल (हिंदी) – नीलांजना गुप्ता
हे प्रभू तुम्हें आचमन मैं क्या करूँ, बस यही दृगधार ही मेरा प्यार है। जगत में निराकार है…
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मैंने उसी दिन सोच लिया था – पीयूष गोयल
utkarshexpress.com – एक छोटे से कस्बें में, कस्बें से दूर एक धार्मिक परिवार रहता था, परिवार में सिर्फ चार लोग…
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