मनोरंजन
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फांस – कंचन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – आखिर कार रवि ने अपने दीमाग से बगावत कर ही ली और मन की सुन चल पड़ा उस…
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वर्षा ऋतु (छंद गीत) -कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
पावस ऋतु जब भी आती है, बादल करते शोर रे। गर्जन तर्जन रिमझिम रिमझिम, हो वर्षा घनघोर रे। धरती…
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सुमन की ज़िन्दगी क्या?- पूनम शर्मा
खहमारी भी तमन्ना है कि अब उपराम पा जाए! पड़े हैं धूप में छाले कहीं तो शाम आ जाए!! सुमन…
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कविता (हरेला पर्व) – जसवीर सिंह हलधर
हरेला हम सबका त्योहार । करें हम धरती का शृंगार ।। प्रश्न मानव से करता यक्ष । लगाए कितने…
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योगिनी एकादशी – सुनील गुप्ता
( 1 ) परम पुण्य योगिनी एकादशी.., पावन व्रत !! ( 2 ) है अश्वमेघ यज्ञ समान व्रत.., फलदायक !!…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
प्यार से हमे देखे,यार अब निहारे भी, पास उसके हम बैठे हाय क्यो पुकारे भी। आशिकी मे हम तुमको…
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गतस्य शोचनम नास्ति एंवई – अनुराधा पांडेय
दिल्’ली से ‘दिल’ लग गया, ‘दिल’ वो बैठा हार। दो दिन की थी ‘दिल्’लगी, दो दिन का ‘दिल’दार।। दिल्’ली…
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वसुधा पर फूल खिलाएं – सीमा शुक्ला
बंजर धरती पर फिर से हरियाली लाएं फिर वसुधा पर रंग बिरंगे फूल खिलाएं। कटे संघन वन, कानन में…
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सच्ची पूंजी- डॉ अनमोल कुमार
बैंक में रखा सोना नहीं, तिजोरी की चाबी नहीं। सच्ची पूंजी वो है जो, देने से कभी घटे नहीं। माँ…
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आकाश के आज़ाद ख़याल : इतिहास, राष्ट्रचेतना और मानवीय संवेदनाओं का काव्य-संसार कुमार धनंजय सुमन
utkarshexpress.com – समकालीन हिन्दी कविता में ऐसे रचनाकार कम मिलते हैं जो इतिहास, पौराणिक आख्यान, राष्ट्रप्रेम, प्रेमानुभूति, प्रकृति, आध्यात्मिक चेतना और…
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