मनोरंजन
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विदेशी आंकड़ों पर नाचते देशी किटाणु (व्यंग्य)- सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – अपनी ख़ासियत है कि अपन को अपने आप पर बिल्कुल विश्वास नही है। विदेश की धरती से जब…
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माँ का एहसान – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
माँ का एहसान क्या शब्दों में उतर पाएगा, जितना लिखूँ, उतना ही मन और झुक जाएगा। जब पहली बार आँखें…
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मां – जया भराड़े बड़ोदकर
तेरे उपकार की सीमा कहां? तेरे जीवन शैली सी कहानी कहां? तू ही भगवान यहां, तेरा अनवरत निस्वार्थ प्रेम जहां।…
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मॉं की ममता (कहानी) – आरती चौगुले
utkarshexpress.com -सुबह छह बजे आँख खुली। आज रविवार था, छुट्टी। ऑफिस जाने की कोई जल्दी नहीं थी। फिर भी आदतन…
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मौसम करवट बदल रहा है – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
मौसम करवट बदल रहा है, धीरे-धीरे रंग नया ढल रहा है, ठंडी हवाओं की चादर हटती, गर्मी का सूरज पल-पल…
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लोकतंत्र – डॉ. प्रियंका सौरभ
लोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात। संसद में चलने लगे, थप्पड़-घूँसे, लात॥ मर्यादा के नाम पर, होती केवल…
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कुर्सी का खेल – अविनाश श्रीवास्तव
कुर्सी का खेल बड़ा निराला, यहाँ हर कोई है मतवाला। सत्ता की इस दौड़ में देखो, अपना-पराया सब है हाला।…
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झांसा वाली रानी (व्यंग्य) – मुकेश “कबीर”
utkarshexpress.com – आखिर दीदी बंगाल हार ही गई लेकिन फिर भी वह इस बात पर अडिग हैं कि “मैं इस्तीफा…
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खेल चल रहा था – ममता सिंह राठौर
अंतर्मन में कोई खेल चल रहा था। फूल और कांटों का मेल चल रहा था। सन्नाटें में भी शोर…
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समाज का आईना है पत्रकार- डॉ अनमोल कुमार
दूसरों को जीना सिखाओगे क्या….? क्योंकि पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखता, वो समाज का आईना होता है, जो सच को…
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