मनोरंजन
-
पीड़ा से जग अनजाना – सीमा शुक्ला
डाली से टूटी लतिका की पीड़ा से जग अनजाना। देखा किसने तरुणाई में कलियों का ओ मुरझाना। दीप करे जगमग…
Read More » -
नीला ड्रम – डॉ अणिमा श्रीवास्तव
अब तो रिश्ते ढोए जा रहे हैं, कोरे भ्रम में, इसलिए लाशें मिल रहीं है , नीले ड्रम में। रूहानी…
Read More » -
स्त्री – कंचन श्रीवास्तव
स्त्री खुश होती है छोटे छोटे अहसासों से जैसे जाड़े में सूखे कड़क कपड़ों से पति बच्चों की जरूरतों पर…
Read More » -
विश्व पर्यावरण दिवस – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ, धरती माँ का मान बढ़ाओ। हरियाली का करो सम्मान, तभी सुरक्षित होगा जहान। स्वच्छ पर्यावरण का…
Read More » -
वृक्ष धरा के रखवाले – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
वृक्षों से ही वन बनते हैं, धरती हरी भरी करते हैं। वर्षा के कारण हैं जंगल, जिससे होता सबका मंगल।1…
Read More » -
जन-जागरण कविता – डॉ अनमोल कुमार
सुबह की पहली किरण बोली, चिड़ियों की चहक यूँ बोली – पेड़ लगाओ, जल बचाओ, पर्यावरण है अनमोल जी, प्रदूषण…
Read More » -
फूल – रुचि मित्तल
फूल कभी शोर नहीं करते वे अपनी मौजूदगी का ऐलान खुशबू की धीमी रौशनी से करते हैं वे धरती की…
Read More » -
कैसे ना हो काया कंचन – सविता सिंह
गुनगुनी दोपहर ढल चुकी, आ गयी सर्द सघन यामिनी| मृण्मयी नैनों में इंतजार लिए, प्रतीक्षारत विकल कामिनी| काले कुंतल अब…
Read More » -
जलती धरती, पर्यावरण पर खतरा – डॉ अनमोल कुमार
धधक रही है धरती माता, लपटों में लिपटा आकाश। पेड़ कटे, नदियाँ सिमटीं, छीन लिया हमने उसका श्वास। हरे-भरे…
Read More » -
ओजस के प्रांगण में मैथिली गीत की मधुर गूँज – sudhir shreevastav
utkarshexpress.com -आध्यात्मिक और साहित्यिक संस्था ओजस मागधी मंच के तत्वावधान में आभासी कार्यक्रम सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया.मंच के…
Read More »