मनोरंजन
-
आँगन में खिली छह खुशियों की बारात — प्रियंका सौरभ
माटी की सोंधी गंध में भीगा, धूप से तपता प्यारा आँगन, जहाँ राजेश ने बोया सपना, जहाँ फूटी थी…
Read More » -
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
छुपा था राज जो दिल मे,भला कैसे छुपाएगा, वफा के नाम पर मुझको नही अब तू सताएगा। तुम्हारे…
Read More » -
अभी तो दिल्ली दूर है (व्यंग्य) – विवेक रंजन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – मैंने दिल्ली जाने का प्लान बनाया तो मित्र ने कहा अरे ‘दिल्ली तो बस एक ट्रेन टिकट दूर…
Read More » -
रास्ता बता – अनिरुद्ध कुमार
छोड़ पीछा जिंदगी और ना सता, भूल बैठें राह अब रास्ता बता। फासला है दूर का दौड़ते फिरें, रौशनी रूठी…
Read More » -
बदला – अंजू लता
प्रतिस्पर्धा, प्रतियोगिता दोनों में है भेद- एक बहाती रक्त है, दूजी श्रम का स्वेद, धोखा देकर वार करे, शत्रु नीच…
Read More » -
कच्ची नींदों के ख्वाब – ज्योत्सना जोशी
बहुत से सवालों के जवाब नहीं हैं, बहुत सी खामोशी जेहन में बेताब थी। और क्या श़र्त रखते राह-ए-इश्क़ में…
Read More » -
ग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधर
आदमी ने कर लिया है झूँठ को स्वीकार अब तो । आचरण में कौम के है युक्त भ्रष्टाचार अब तो…
Read More » -
माँ तुम्हीं नजर मुझे आयी थी – राधा शैलेन्द्र
न जाने कौन सा जादू है माँ तुम्हारे होने में कोई तरीका आता नहीं तुम्हें भूल जाने का! खुद…
Read More » -
श्रमेव जयते – सुनील गुप्ता
श्रमेव जयते, जयते जयते !! मज़दूर हूं मज़दूरी करता रहता काम की तलाश में ! गांव सड़क पे रहता…
Read More » -
पीड़ा एक नौकर की – डॉ जयप्रकाश तिवारी
नाम का भूखा नहीं हूँ मैं धन का भूखा नहीं हूँ मैं किन्तु कैसे मैं यह कह दूँ…
Read More »