गीत – नित्यानंद वाजपेई

तुम दिवाली खूब जी भर कर मनाना मित्र मेरे,
किंतु दीपक एक मन का भी जलाना मित्र मेरे।
मानता हूं बाहरी दीपों से अंधियारा मिटेगा,
किंतु अंतर दीप से दोनों तरफ सारा मिटेगा,
एक रत्ती बात मेरी मान जाना मित्र मेरे,
तुम दिवाली खूब जी भर कर मनाना मित्र मेरे,
किंतु दीपक एक मन का भी जलाना मित्र मेरे।
बेबसों के घर उजाला दीप मन का कर सकेगा,
सरहदों पर जो डटे हैं दीप उनके घर जलेगा,
बस दिलों से दिल मिलाना मा- बदौलत,
तुम दिवाली खूब जी भर कर मनाना मित्र मेरे,
किंतु दीपक एक मन का भी जलाना मित्र मेरे।
द्युति हृदय की दूसरे मन भी कई रोशन करेगी,
और उज्वल विश्व को छन-छन करेगी,
मुक्ति के आलोक पथ चल दिखाना मित्र मेरे,
तुम दिवाली खूब जी भर कर मनाना मित्र मेरे,
किंतु दीपक एक मन का भी जलाना मित्र मेरे।
– नित्यानंद वाजपेयी “उपमन्यु”
गीता विहार कॉलोनी, पांचाल घाट, गंगाधाम
फतेहगढ़ फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश)- 209601




