मनोरंजन
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श्रावण माह में शिवार्चन (2) (बाबा अमरनाथ जी, जम्मू कश्मीर) कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी
अमरनाथ की कठिन चढ़ाई, कभी न आड़े आती है। लगा-लगा कर शिव जयकारे, भक्त मंडली जाती है। सावन में ही…
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भोजपुरी लोक गीत — श्याम कुंवर भारती
परदेशीया साजन सुनबे करी। गुजरिया के दरदिया सुनबे करी। रात दिन मोर तड़पे परनवा, रेलिया धई ऊ पहुंचबे करी…
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आवाज़ तुम्हारी – अनिल भारद्वाज
यादों के इस रंगमहल में, गूंज रही आवाज तुम्हारी। तुम जिस बगिया के माली थे उसकी पंखुड़ियां रोतीं हैंं, उन्हें…
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ग़ज़ल – नित्यानंद वाजपेई
आईना बाद में दुनिया को दिखाया जाए, पहले किरदार ज़रा ख़ुद का सजाया जाए। सिर्फ़ अश्कों से कहाँ धुलती है…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
प्यार करता था भले दिल से, वो सच्चे न रहे, दर्द को सह ले जो भीतर वो फरिश्ते न रहे।…
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बचपन की एक प्यारी-सी याद – श्री ठाकुर
ये पंक्ति यूँ ही नहीं ठहर गई मेरी रूह में, बचपन की किसी प्यारी-सी बात ने इसे मेरी पहचान बना…
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काश… तुम साथ होते (कहानी) – डॉ. सुधाकर आशावादी
utkarshexpress.com – एक अरसे बाद पुराने शहर लौटा, तो बहुत कुछ बदला बदला सा प्रतीत हुआ। चौराहों पर चहल पहल…
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किशोर कुमार – डॉ अनमोल कुमार
आवाज़ में जादू, अंदाज़ में मस्ती, नाम था किशोर, काम था हस्ती। कभी आशिक, कभी जोकर बन जाए, एक ही…
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गुरु पूर्णिमा (एक गीत) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
काव्य सृजन की लिए लालसा, गुरु चरणों में मैं आया। मन के इस विस्तृत वितान पर, सप्त रंग है बिखराया।…
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माँ का एहसान – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
माँ का एहसान क्या शब्दों में उतर पाएगा, जितना लिखूँ, उतना ही मन और झुक जाएगा। जब पहली बार आँखें…
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