मनोरंजन
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भगवद् कृपा न जाहु बखानी – सुनीलानंद
( 1 ) श्री हरि कृपा अनन्य भक्ति से मिले, कर न सकें इसे बखान ! है ये भावों का…
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पिता – सविता सिंह
पिता को लिखूँ, इतना सामर्थ्य कहाँ!” मेरी सामर्थ्य कहाँ, जो मैं पिता को शब्दों में बाँधूँ, जिन्होंने स्वयं मुझे गढ़ा…
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मुआबज़ा बनाम कफन – कंचन श्रीवास्तव
सरकार मुआबज़ा दे रही उन मासूमों की जिंदगी का जो बेजोड़ ,बेमिसाल, अपने मां-बाप के लिए अनमोल थे। जिनकी जिंदगी…
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गांधी जी के तीन बंदर और लोकतंत्र की सीढ़ियाँ (व्यंग्य) – विवेक रंजन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – घर की वह चौड़ी संगमरमरी सीढ़ियाँ उस दिन किसी पार्लियामेंट्री ब्लॉक से कम नहीं लग रही थीं। दोपहर…
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जेठ माह के अष्टम बड़े मंगल – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
मारुति नंदन कष्ट निकंदन जीवन में खुशियाँ भर देना। मानव को ग्रस ले यदि संकट दूर तभी उसको कर देना।…
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साँसें तुमको ढूँढ रही – सविता सिंह
तुम आ जाओ तो निखरूँ मैं! तुम बिन जैसे थमा हुआ है, धड़कन का हर एक स्पंदन, तुम बिन सूना…
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विश्व शरणार्थी दिवस (20 जून) – डॉ अनमोल कुमार
सरहद पर काँटे लगे हैं, पर धरती तो एक ही है। पासपोर्ट जला, घर उजड़ा, पर इंसानियत नेक ही है।…
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नारी का बलिदान — नीलांजना गुप्ता
आज बताती हूँ मैं तुमको नारी के बलिदान को क्यों है ठेस लगाई तुमने नारी के सम्मान को भ्रूण…
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तुमसे मिलना – रुचि मित्तल
तुमसे मिलना कुछ वैसा था जैसे बरसों से बंद पड़ी किताब में अचानक एक सूखा हुआ फूल मिल जाए जिसकी…
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तन तो माटी का – डॉ अनमोल कुमार
तन तो बना माटी का , तन मंदिर कहलाय । ता में है आसन बना , जा में है देव…
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