मनोरंजन
-
ग़ज़ल – रीता गुलाटी
दर्द की यारो सहर होती नही, पास गर हो तो फिकर होती नही। नूर तेरा आँख मे मेरे बसा,…
Read More » -
मोबाइल वाले यमदूत – सुनील गुप्ता
ये यमदूत हैं मोबाइल वाले, बड़े निराले !!1!! ख़बर सभी इंसानों की रखते, हैं नवोन्मेषी !!2!! वाहन भैंसा…
Read More » -
पर्यावरण -श्याम कुंवर भारती
बिगड़े मौसम में तूफान आ गया ,लगा के आग अब न हवा दीजिए। सुख गए हैं जो पेड़ बिना पानी…
Read More » -
नियम जो सत्ता के अनुकूल – मीना तिवारी
कलम लिखती वही जो सत्ता के अनुकूल हो। अगर लिख न सकी, तो वह धूल ही धूल है। मुड़ती…
Read More » -
टूटती चूड़ियों और छूटती किताबे – डाॅ अनमोल कुमार
उसके हाथ में कलम होनी चाहिए, पर हथौड़ा क्यों है? उसकी उम्र कंधे पर बस्ता उठाने की, पर ईंटें क्यों…
Read More » -
मां की अलमारी (लघु कथा) – कंचन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – रीता का जीवन खुली किताब थी जिसे कोई भी पढ़ सकता था।हो भी क्यों ना ऐसा कुछ था…
Read More » -
अदरक की चाय – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
सुबह की ठंडी अंगड़ाई में, जब सूरज धीरे मुस्काता है, मिट्टी की खुशबू संग अदरक, मन का कोना महकाता है।…
Read More » -
पीड़ा से जग अनजाना – सीमा शुक्ला
डाली से टूटी लतिका की पीड़ा से जग अनजाना। देखा किसने तरुणाई में कलियों का ओ मुरझाना। दीप करे जगमग…
Read More » -
नीला ड्रम – डॉ अणिमा श्रीवास्तव
अब तो रिश्ते ढोए जा रहे हैं, कोरे भ्रम में, इसलिए लाशें मिल रहीं है , नीले ड्रम में। रूहानी…
Read More » -
स्त्री – कंचन श्रीवास्तव
स्त्री खुश होती है छोटे छोटे अहसासों से जैसे जाड़े में सूखे कड़क कपड़ों से पति बच्चों की जरूरतों पर…
Read More »