मनोरंजन
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बदल गया इंसान (लघुकथा) – डा. सहदेव बालियान
utkarshexpress.com – ज्येष्ठ महीने की चिलकती धूप वाली तेज गर्मी पड़नी शुरू हो गई थी.सुबह शाम क्यारी के पेड़-पौधों की…
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धड़कन और ज़िंदगी – रुचि मित्तल
धड़कन और ज़िंदगी की दोस्ती भी कम अजीब नहीं एक चलती है तो दूसरी साँस लेती है, एक रुक जाए…
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पीड़ा से जग अनजाना – सीमा शुक्ला
डाली से टूटी लतिका की पीड़ा से जग अनजाना। देखा किसने तरुणाई में कलियों का ओ मुरझाना। दीप करे जगमग…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
यार मिलकर दुआ तो देते हैं, जानकर फिर भुला तो देते हैं। छोड़कर वो भले गये हमको, फिर भी…
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भगवद् कृपा न जाहु बखानी – सुनीलानंद
( 1 ) श्री हरि कृपा अनन्य भक्ति से मिले, कर न सकें इसे बखान ! है ये भावों का…
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पिता – सविता सिंह
पिता को लिखूँ, इतना सामर्थ्य कहाँ!” मेरी सामर्थ्य कहाँ, जो मैं पिता को शब्दों में बाँधूँ, जिन्होंने स्वयं मुझे गढ़ा…
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मुआबज़ा बनाम कफन – कंचन श्रीवास्तव
सरकार मुआबज़ा दे रही उन मासूमों की जिंदगी का जो बेजोड़ ,बेमिसाल, अपने मां-बाप के लिए अनमोल थे। जिनकी जिंदगी…
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गांधी जी के तीन बंदर और लोकतंत्र की सीढ़ियाँ (व्यंग्य) – विवेक रंजन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – घर की वह चौड़ी संगमरमरी सीढ़ियाँ उस दिन किसी पार्लियामेंट्री ब्लॉक से कम नहीं लग रही थीं। दोपहर…
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जेठ माह के अष्टम बड़े मंगल – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी
मारुति नंदन कष्ट निकंदन जीवन में खुशियाँ भर देना। मानव को ग्रस ले यदि संकट दूर तभी उसको कर देना।…
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साँसें तुमको ढूँढ रही – सविता सिंह
तुम आ जाओ तो निखरूँ मैं! तुम बिन जैसे थमा हुआ है, धड़कन का हर एक स्पंदन, तुम बिन सूना…
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