मनोरंजन
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विश्व शरणार्थी दिवस (20 जून) – डॉ अनमोल कुमार
सरहद पर काँटे लगे हैं, पर धरती तो एक ही है। पासपोर्ट जला, घर उजड़ा, पर इंसानियत नेक ही है।…
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नारी का बलिदान — नीलांजना गुप्ता
आज बताती हूँ मैं तुमको नारी के बलिदान को क्यों है ठेस लगाई तुमने नारी के सम्मान को भ्रूण…
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तुमसे मिलना – रुचि मित्तल
तुमसे मिलना कुछ वैसा था जैसे बरसों से बंद पड़ी किताब में अचानक एक सूखा हुआ फूल मिल जाए जिसकी…
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तन तो माटी का – डॉ अनमोल कुमार
तन तो बना माटी का , तन मंदिर कहलाय । ता में है आसन बना , जा में है देव…
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ग़ज़ल – रीता गुलाटी
दर्द की यारो सहर होती नही, पास गर हो तो फिकर होती नही। नूर तेरा आँख मे मेरे बसा,…
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मोबाइल वाले यमदूत – सुनील गुप्ता
ये यमदूत हैं मोबाइल वाले, बड़े निराले !!1!! ख़बर सभी इंसानों की रखते, हैं नवोन्मेषी !!2!! वाहन भैंसा…
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पर्यावरण -श्याम कुंवर भारती
बिगड़े मौसम में तूफान आ गया ,लगा के आग अब न हवा दीजिए। सुख गए हैं जो पेड़ बिना पानी…
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नियम जो सत्ता के अनुकूल – मीना तिवारी
कलम लिखती वही जो सत्ता के अनुकूल हो। अगर लिख न सकी, तो वह धूल ही धूल है। मुड़ती…
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टूटती चूड़ियों और छूटती किताबे – डाॅ अनमोल कुमार
उसके हाथ में कलम होनी चाहिए, पर हथौड़ा क्यों है? उसकी उम्र कंधे पर बस्ता उठाने की, पर ईंटें क्यों…
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मां की अलमारी (लघु कथा) – कंचन श्रीवास्तव
utkarshexpress.com – रीता का जीवन खुली किताब थी जिसे कोई भी पढ़ सकता था।हो भी क्यों ना ऐसा कुछ था…
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